पत्रकारिता ही समाज को आइना दिखाने का काम करती है जो की एक बेहतर समाज के उत्थान लिए जरूरी भी है - वरिष्ठ पत्रकार सुधीर शर्मा

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खबर थांदला से ..............

थांदला - चार दशक पूर्व जब जिले में पत्रकारिता का अंकुरण हुआ था तब जिले की छोटी काशी कहे जाने वाले थांदला नगर जहां जेन जवाहरलाल मुनि,नागादेव नारायण दास, आचार्य उमेश मुनि जैसे संत तो पण्डित नारायणआचार्य (शास्त्रीजी), बाबूलाल आचार्य, हीरालाल शास्त्री, जय शंकर पाठक जैसे विद्वानों ने जन्म लिया तो पत्रकारिता के अंकुरण के बीज बोने वाले सुरेंद्र कांकरिया, ओम भट्ट, डॉक्टर उमेश शर्मा, भूपेंद्र पावेचा, मनोज चतुर्वेदी जेसे पत्रकारों ने पत्रकारिता का बिगुल इस आदिवासी अंचल में बजाया उसी समय मे नगर के वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर विश्वनाथ शर्मा के छोटे पुत्र सुधीर शर्मा ने पत्रकारिता का क, ख, ग, सीख नया आयाम दिया। संघर्षो के उस दौर में सुधीर शर्मा ने न केवल अखबार बांटने का कार्य स्वयं किया अपितु साइकिल से समाचार संकलन का कार्य भी जिम्मेदारी के साथ निभाया। अपनी 40 वर्षीय पत्रकारिता को शर्मा एक साधना मानते हुए कहते है कि वर्तमान पत्रकारिता चरण धोग व व्यावसायिक हो गयी है। पत्रकारिता के व्यावसायिक होने के चलते इसका स्तर भी गिरने लगा। वर्तमान पत्रकारिता और उस से जुड़े महानगरो से ले कर अंचल तक के लोग अपना तथा संस्थान के साथ कथित संगठनों के स्वार्थ के लिए पत्रकारिता के मान्य मापदण्डो, ऊसुलो को ताक में रख पत्रकारिता में लिप्त हो गए। पत्रकारिता सरकार व समाज के आईने के रूप में होना चाहिए न कि स्वार्थ लोलुपता से लबरेज। थांदला नगर के वरिष्ठ पत्रकार सुधीर शर्मा पत्रकारिता में विभिन्न मीडिया समूहों से जुड़ कर चार दशक से अनवरत सेवा दे रहे है। 62 वर्ष की उम्र में भी अल सुबह से देर रात तक शासन, सरकार व समाज के लिए आईना बन सेवा कार्य मे जुटे है। सुधीर शर्मा का आज अवतरण दिवस है। अपने जन्मदिन से पूर्व नगरीय क्षेत्र के पत्रकारों से चर्चा के दौरान चार दशक की पत्रकारिता और उसमें आये बदलावों पर कटाक्ष करते हुए कहते है, आजकल पत्रकारिता बस पैसे जुटाने का जरिया बन चुका है, इसी स्वार्थ के चलते पत्रकारिता का स्तर गिरता जा रहा हैं, जिसका समाज में गलत संदेश जा रहा है। आखिर ये सब रुकेगा कैसे ? ये सब उन लोगो के द्वारा ही सम्भव हो पायेगा जो मीडिया से जुड़े हैं। मीडिया से जुड़े लोगो को ही इसके लिए पहल करनी होगी। मीडिया जगत में लगातार बढ़ रहे राजनैतिक प्रभाव और चंद पैसो के खातिर खुद को नीलाम करने की प्रवृति अगर वक़्त रहते समाप्त नहीं की जाती तो ये आने वाले समय में समाज के लिए बहुत बड़ा खतरा बन सकती है, क्योंकि पत्रकारिता ही समाज को आइना दिखाने का काम करती है, जो की एक बेहतर समाज के उत्थान लिए जरूरी भी है। शर्मा ने नवोदित पत्रकारों को निष्पक्ष, ईमानदारी से क्रान्तिकारी पत्रकारिता का संदेश दिया।

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