यह भूपेन्द्र यादव का ही दम खम रहा कि आरएएस के इंटरव्यू का परिणाम जारी हो गया।

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खबर राजस्थान से .................

यानी राजस्थान लोक सेवा आयोग की सदस्य राजकुमारी गुर्जर ने किसी भी अभ्यर्थी को अधिक अंक नहीं दिलवाए। 

जयपुर - आरएएस यानी राजस्थान प्रशासनिक सेवा भर्ती परीक्षा 2018 का परिणाम 13 जुलाई की देर रात को घोषित कर दिया। यह राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष भूपेन्द्र यादव का ही दम खम रहा कि उन्होंने सारे दबावों को परे ढकलते हुए परिणाम घोषित कर दिया। 13 जुलाई को दोपहर एक बजे इंटरव्यू का काम पूरा हुआ और रात को परिणाम घोषित हो गया। हालांकि इंटरव्यू के अंतिम दिन ही परिणाम घोषित करने की आयोग की परंपरा है, लेकिन सब जानते हैं कि आरएएस के इंटरव्यू के अंतिम दिन 13 जुलाई से पांच दिन पहले 9 जुलाई को एसीबी ने आयोग के जूनियर अकाउंटेंट सज्जन सिंह गुर्जर को 23 लाख रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया था। अगले दिन 10 जुलाई को बांदीकुई क्षेत्र से नरेन्द्र पोसवाल नाम के व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया। मीडिया में खबरों में कहा गया कि सज्जन सिंह गुर्जर यह रिश्वत आयोग की सदस्य श्रीमती राजकुमारी गुर्जर के नाम पर ले रहा था। श्रीमती गुर्जर भी आयोग के अन्य सदस्यों की तरह आरएएस भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थियों के इंटरव्यू ले रही थीं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि तब आयोग के अध्यक्ष डॉ. यादव की क्या स्थिति रही होगी। इधर अखबारों में छप रहा है कि इंटरव्यू में अधिक अंक दिलवाने के लिए अभ्यर्थियों से रिश्वत ली जा रही है, उधर आयोग के अध्यक्ष के समक्ष इंटरव्यू की निष्पक्षता बनाए रखने की चुनौती थी। अखबारों में एसीबी के हवाले से कुछ भी छपता रहा हो, लेकिन सभी दबावों को परे ढकलते हुए डॉ. यादव ने इंटरव्यू का परिणाम घोषित कर दिया। अब चाहे एसीबी आयोग की सदस्य श्रीमती गुर्जर के पति पूर्व आईपीएस भैरो सिंह गुर्जर को गिरफ्तार करें या पूछताछ के लिए बुलाए, लेकिन डॉ. भूपेन्द्र यादव ने यह दर्शा दिया है कि आरएएस के इंटरव्यू में राजकुमारी गुर्जर ने किसी भी अभ्यर्थी को उसकी योग्यता से अधिक अंक न तो दिए हैं और न ही किसी सदस्य से दिलवाए हैं। किसी लालच से अधिक अंक दिलवाने वाली खबरों में दम होता तो आरएएस का परिणाम जारी नहीं हो सकता था। डॉ. यादव ने परीक्षा परिणाम जारी कर यह साबित कर दिया है कि इंटरव्यू का काम फूलप्रुफ है। सब जानते हैं कि आयोग का अध्यक्ष बनने से पहले डॉ. यादव राजस्थान के पुलिस महानिदेशक थे। डॉ. यादव की छवि ईमानदार और सख्त पुलिस अधिकारी की रही है। वे एसीबी की कार्यप्रणाली से भी अवगत है। कोई माने या नहीं, लेकिन डॉ. यादव की जगह आयोग का और कोई ओर सदस्य होता तो एसीबी की इतनी बड़ी कार्यवाही से घबरा जाता। इस घबराहट का नुकसान आरएएस भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थियों को उठाना पड़ता। डॉ. यादव ने न केवल परिणाम घोषित किया बल्कि यह कहा भी कि कोई व्यक्ति आयोग के बाहर लोगों से क्या झूठा प्रॉमिस करके झांसे में ले रहा है, इसका आयोग को कैसे पता चलेगा? परिणाम घोषित होने से आयोग की सदस्य राजकुमारी गुर्जर को भी राहत मिली है, क्योंकि अब आयोग ने भी मान लिया है कि इंटरव्यू प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। जब राजकुमारी गुर्जर के स्तर पर कोई गड़बड़ी ही नहीं हुई तो फिर एसीबी के हवाले से अखबारों में कुछ भी छपता रहे। डॉ. यादव ने आरएएस का परिणाम घोषित कर राजस्थान लोक सेवा आयोग की साख को भी बनाए रखा है। 

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